नाहन: यह हार नहीं,शुरूआत है चुनावी रण की...नगर परिषद चुनाव में...मनीष जैन, आशा भारद्वाज, अभिषेक चौधरी,अर्पिता बख़्शी ने दिखाया आईना..
अक्स न्यूज लाइन नाहन 23 मई :
नगर परिषद चुनाव में पहली बार मनीष जैन, आशा भारद्वाज, अभिषेक चौधरी,अर्पिता बख़्शी ने ताल ठोक कर सियासत में लगे नेताओं को आइना दिखाया है। लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवारो से हार गए। लेकिन यह हार नही है, यह हार तो शुरूआत है भविष्य के चुनावी रण की। कहा जाता है कि हारना एक अलग बात है लेकिन हार न मानना सबसे बड़ा जनून होता है। हार का स्वाद तो बडे बडे नेता भी चखते आए हैं।
ये उम्मीदवार पहली बार चुनावी समर में उतरे महज 15 दिन के भीतर अपने अपने वार्डो में सियासत में मंझे कांग्रेस के उम्मीदवारो के पसीने निकलवा दिए। कोई सियासी जमीन नही, कोई वोट बैंक नही,कोई परिवारिक पृष्ठभूमि नही बस भाजपा की विचारधारा के कारण पार्टी के।समर्थन से चुनावी मैदान में उतरे।
वार्ड नं 2 से पहली बार चुनाव में उतरे भाजपा समर्थित समाज सेवी मनीष जैन किसी परिचय के मोहताज़ नही, कोई सियासी जमीन नही थी लेकिन चुनाव में कांग्रेस समर्थित नरेंद्र तोमर को कड़े मुकाबले से गुजरना पड़ा। जैन को कुल 1487 मतों में से 718 मत मिले।
वार्ड नं 3 से पहली बार चुनावी मैदान में बीजेपी के समर्थन से चुनाव लड़ने वाली आशा भारद्वाज समाज सेवी रही, सियासत में नई है । लेकिन अपने व्यवहार से इस चुनाव में कुल 1219 मतों में से 423 मत मिले।
वार्ड नं 6 से पहली बार कांग्रेस के अभी तकचुनाव में अजय रहे छटी बार चुनावी समर में उतरे दिगज्ज पार्षद योगेश गुप्ता के खिलाफ मैदान में उतरी अर्पिता बख़्शी ने 166 भले ही लिए हों। लेकिन कांग्रेस के दिगज्ज जो अभी तक चुनाव नही हारे के सामने महिला शक्ति का उतरना ही महत्वपूर्ण कदम है। कम समय में बिना किसी वोट बैंक के यह शुरूआत ही तो है..
वार्ड नं 7 से पहली बार युवा चेहरे अभिषेक चौधरी ने बीजेपी समर्थन से,कांग्रेस के दिग्गज पार्षद लगातार पांचवीं बार चुनाव जीते राकेश गर्ग पपली के खिलाफ जब अन्य कई भाजपा के नेताओँ ने जब इस वार्ड से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया तब अभिषेक चौधरी ने ताल ठोकी।
अभिषेक चौधरी को कुल 886 मतों में से 319 मत मिले। वार्ड में कांग्रेसी पार्षद के सामने चुनावी समर में खड़े होकर, कुछ ही दिनों जनसम्पर्क से 319 लोगों का समर्थन चुनावी पारी का आगाज़ ही तो है।
यह भी सच है कि आने चुनाव में नगर परिषद में कांग्रेस- बीजेपी चेहरे जरूर बदलेंगे, कुछ दिगज्ज मैदान से हटेंगे, कुछ चुनाव में पटखनी खायेंगे, इसकी शुरुआत हो चुकी है। कहा जाता है कि हारना एक अलग बात है लेकिन हार न मानना सबसे बड़ा जनून होता है। हार का स्वाद तो बडे बडे नेता भी चखते आए हैं। ऐसे में यह हार एक कदम है भविष्य की जीत के लिए।









