पीठासीन अधिकारी समिति की बैठक में बोले पठानियां समिति प्रणाली लोकतन्त्र में निभाती है “मिनी सदन” की भूमिका।
अक्स न्यूज लाइन जयपुर 05 मई :
बैठक आरम्भ होने से पूर्व राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासूदेव देवनानी द्वारा सभापति तथा अन्य सभी सदस्यों का परम्परागत सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने समिति प्रणाली की लोकतन्त्र में भूमिका तथा इसके सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी सांझा किए। लोक सभा द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की इस समिति का मुख्य उद्देश्य विधान मण्डलों की समितियों को कैसे सशक्त किया जाए तथा अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके। इसी हेतु समिति की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया है।
अपने सम्बोधन के दौरान पठानियां ने कहा कि समिति प्रणाली किसी भी लोकतान्त्रिक विधायिका का महत्वपूर्ण अंग है क्योंकि यह संसद तथा विधान मण्डलों के कार्यों को अधिक प्रभावी विशेषज्ञतापूर्ण और उत्तरदायी बनाती है। भारत जैसे विशाल लोकतन्त्र में विधेयकों की गहन जांच, सरकारी नितियों की समीक्षा तथा कार्यपालिका पर नियन्त्रण स्थापित करने में समितियों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। सम्बोधन के दौरान पठानियां ने कई सुझाव भी दिए तथा कहा कि समितियों की सिफारिशों को अधिक प्रभावी और बाध्यकारी स्वरूप दिया जाना चाहिए। वर्तमान में समितियों की रिर्पोट केवल परामर्शात्मक होती है यदि सरकार को सिफारिशों पर निश्चित समय सीमा में उत्तर देना अनिवार्य किया जाए तो समितियों की उपयोगिता बढ़ेगी।
महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से समितियों के पास भेजा जाना चाहिए। यदि सभी प्रमुख विधेयकों को विभागीय स्थाई समिति के पास भेजने की परम्परा विकसित हो तो कानून अधिक व्यवहारिक और जनहितकारी बनेंगे। समितियों को विशेषज्ञ सलाहकार, शोधकर्ता और डेटा विश्लेषक उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि निर्णय तथ्यपरक और गुणवतापूर्ण हो।
समिति सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यशालाएं और अन्तर्राष्ट्रीय संसदीय अनुभवों का अध्ययन कराया जाना चाहिए इससे समिति की कार्यक्षमता बढेगी। समितियों की बैठकों की संख्या और उपस्थिती सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति की सक्रीय भागीदारी और नियमित बैठकें समिति कार्यों को प्रभावी बनाएंगी। समिति कार्यवाही में पारदर्शिता और जनसहभागिता बढ़ाई जानी चाहिए। इससे लोकतन्त्र अधिक सहभागी बनेगा। समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति में दलीय राजनीति से ऊपर उठकर योग्यता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। ऑनलाईन बैठकें, डिजिटल दस्तावेज प्रबन्धन, डेटा विश्लेषक और लाइव अपडेट जैसी व्यवस्थाएं समिति कार्य को आधुनिक और तेज बना सकती है।








