नाहन:नप चुनाव में मतदाता खामोश, वार्डों में सीधे मुकाबले से दिगज्ज पार्षदों के छूट रहे पसीने..
अक्स न्यूज लाइन नाहन 11 मई :
नाहन नगर परिषद के चुनाव में वोटिंग में अभी 6 दिन बाकी है,मगर पुर्व में हुए चुनावों की अपेक्षा इस बार मतदाता खामोश है। ऐसे में कई कई बार पूर्व में चुनाव लड़ कर नगर परिषद की पिछले दो दशकों से सियासत करने वाले दिग्गज कहलाने वाले नेताओं के भी इस चुनाव में वार्डों में पसीने छूट रहे हैं। नगर परिषद चुनाव में विधायक अजय सौलंकी व बीजेपी राज्य अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
नाहन नगर परिषद में पिछले 10 सालों से भाजपा काबिज रही है। ऐसे में एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर भी भाजपा के उमीदवारों को झेलना पड़ रहा है। यह भी जगजाहिर है कि वर्तमान में रही नगर परिषद के आड़े कांग्रेस व खुद भाजपा के कुछ अपने पार्षद आते रहे हैं । यह सबसे बडी विडम्बना थी किबहुमत में होने के बावजूद जन हित मे बहेतर प्रदर्शन की कमी रही।
उधर पिछले 3 सालों कांग्रेस सरकार के आते ही नगर परिषद में कांग्रेसी नेताओं का दबाव और मनमानी नजर आई शहर में विकास ठप्प करने के आरोप भी कांग्रेस-भाजपा के पार्षद व नेता अक्सर लगाते रहे।
यह भी सही है कि नप चुनाव क्लोज दायरे का है। लोग निजी कामों को याद रखते हैं ऐसे चुनकर गए पार्षद निजी काम कराने में।आगे रहते हैं वोट के लिए। चुनाव में इस बार भी बड़े बड़े वायदे वोट झटकने के सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं।
झुठे सब्जबाग दिखा रहे हैं। सालों से शहर को ज्वलन्त समस्याओं और मुद्दो को निपटाने में फेल रहे हमारे पार्षद फिर किस हक से वोट मांग रहे जनता के दरबार में जाकर,जनता इसी लिए खामोश है कि चुनकर कोई भी आ जाए, सिस्टम तो नहीं बदलेगा।
चुनावी गलियारों में चर्चा कि सभी 13 वार्डों में कांटे की टक्कर है। जैसे जैसे मतदान का समय आ रहा है वैसे वैसे मुकाबला कठिन और रोमांचक होता जा रहा है। चुनाव तो चुनाव है, अक्सर देखा गया है कि साधरण कार्यकर्ता दिगज्ज नेताओं को पटखनी दे देता है,हार जीत में अंतर तो एक वोट से भी रह जाता हैं ऐसे में सामने वाले को कतई कम नही आंकना चाहिए।
इस चुनाव में भाजपा नगर परिषद में अपना किला बचाने के जोर मार रही हैं तो कांग्रेस परिषद में अपनी ताजपोशी करा कर अपनी लोकप्रियता साबित करने में जुटी है। नप चुनाव में शहर में कांग्रेस सरकार विकास के कार्यो का मूल्यांकन भी करेगा। इसी कड़ी में विधायक अजय सोलंकी वार्डो में चुनाव प्रचार उतरे है।
अब 17 मई को यह तय होगा कि भाजपा की परिषद में एक बार फिर से वापसी होगी या कांग्रेस का परचम लहराएगा।









