नाहन: जनता ने वोट दे दिया..अब नगर परिषद चुनाव में विकास के वायदों की झड़ी लगाने वाले नेताओं की बारी..

नाहन: जनता ने वोट दे दिया..अब नगर परिषद चुनाव में विकास के वायदों की झड़ी लगाने वाले नेताओं की बारी..
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अक्स न्यूज लाइन नाहन 19 मई :

नगर परिषद के चुनाव में बीते दिन हुई पोलिंग का गिरता ग्राफ लोक तन्त्र व सिस्टम को पटरी पर रखने को लेकर चिंता जनक और चिंतनीय है। अक्सर सियासी दल इसको गंभीरता से नही लेते एक चुनाव गया दूसरा आ गया यह क्रम चले जा रहा है।

 चुनावी समर में मतदान को लेकर आम लोगों की बेरुखी के पीछे खुद इन नेताओं के कागजी वायदे औऱ झुठे सब्जबाग ही है। कमोबेश यह हालत हर चुनाव में नजर आती है। सियासी दलों की विचारधारा से जुड़े लोग दलबल सहित वोट डालने आ जाते है लेकिन 25 -30 फ़ीसदी मतदाता तो घरों से वोट के लिए निकलता ही नहीं है उसका क्या करें।

मिसाल के तौर पर नगर परिषद नाहन के लिए 67.39 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। मतदान  की प्रतिशतता लोगों की नेताओं के  के प्रति नाउम्मीदी व मतदान को लेकर उदासीनता साबित कर रही है । वोटिंग का ग्राफ़ नीचे रहने से कई वार्डों में दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों का गणित बिगड़ कर रह गया। ऐसे में कई वार्डों में इन पार्टियों के समर्थन वाला उम्मीदवार जीतने से रह गए। नगर परिषद के चुनावी नतीजे तीसरी बार फिर से भाजपा के पक्ष में गए है। दस सालों से परिषद की सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस इस बार भी बहुमत से पिछड़ी है।

सालों से जनता यह समझ चुकी है कि स्थानीय निकायों में सत्ता भले ही किसी दल को मिले इसके कोई फर्क पड़ने वाला नही है, क्योंकि सिस्टम नही सुधरेगा, ऐसे में क्षेत्र की ज्वलन्त समस्याओं का निराकरण  नही हो सकता। चुनाव जीत कर पार्षद वापस नहीं लौटते, आरोप में की  वोट बैंक बनाए रखने के लिए लोगों के निजी कामो को तवज्जो देने में मशगूल हो जाते हैं। ऐसे में ज्वलन्त समस्याएं सालों से मुहबाय खड़ी है। शहर की नगर परिषद क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं, यहां की ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव केवल  चुनाव के दौरान वायदों में नजर आता है।

उधर कम वोटिंग ने भी वार्डो में चुनाव लडने उम्मीदवारो व कांग्रेस-भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरा है। एक दूसरे का सूपड़ा साफ करने के दावों के बीच 13 वार्डो में से 6- 6 सीटों पर के कांग्रेस-भाजपा जब अटक गई तो वार्ड नं 13 से नतीजा भाजपा के पक्ष आया तब कहीं जा कर एक सीट से बहुमत मिला और कांग्रेस एक सीट से पिछड़ गई।

अब सवाल यह भी है कि कांग्रेस के विधायक अजय सोलंकी व बीजेपी राज्य अध्यक्ष डॉ राजीव बिन्दल द्वारा शहर के लिए किए गए चुनावी वायदों का क्या होगा। नगर परिषद में बीजेपी फिर से काबिज हो रही है, सरकार कांग्रेस की है, अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। नगर परिषद के लिए विकास कार्यों की घोषणाओ झड़ी लगाने वाले नेता अगले साल वोट बटोरने के लिए अपनी इन योजनाओं को कितना सत्य के धरातल पर उतारते हैं यह तो समय ही तय करेगा।


जनता ने वोट दे दिया..अब नगर परिषद चुनाव में विकास के वायदों की झड़ी लगाने वाले नेताओं की बारी है।