अक्स न्यूज लाइन शिमला 07 मई :
नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटेरिएट ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट (ISTM) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 34 नव नियुक्त स्टेनोग्राफरों के एक दल ने बुधवार को भा.कृ.अनु. प.-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला का शैक्षणिक अध्ययन दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य प्रतिभागियों को देश के प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों से अवगत कराना था।
केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारत की कृषि अनुसंधान प्रणाली को सशक्त बनाने में इस संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। संस्थान द्वारा उन्नत आलू अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से उच्च उत्पादकता एवं रोगरोधी आलू किस्मों के विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तकनीकों तथा देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में टिकाऊ आलू खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी गई।
संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली में भा.कृ.अनु. प.-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के योगदान तथा आलू उत्पादन, पोषण सुरक्षा एवं किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने हेतु किए जा रहे निरंतर प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आलू विश्व की प्रमुख खाद्य फसलों में से एक है और भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. कविता शर्मा, सहायक निदेशक, आईएसटीएम ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत आईएसटीएम केंद्रीय सचिवालय कर्मियों एवं अन्य सरकारी संस्थाओं के क्षमता निर्माण हेतु एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों, विस्तार कार्यक्रमों एवं आलू विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियों की जानकारी दी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी श्री रजत सेठी ने संस्थान की प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं कार्यप्रणाली से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
इस प्रतिनिधिमंडल में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों—कृषि एवं किसान कल्याण, नागरिक उड्डयन, ग्रामीण विकास, आवास एवं शहरी कार्य, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, वाणिज्य एवं उद्योग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय—में कार्यरत बैच-34 के स्टेनोग्राफर शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पिनबियांगलांग के. द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।