झूठे हैं मुख्यमंत्री, प्रदेश बेचते हुए प्रदेश हितैषी बनने का कर रहे हैं ढोंग : जयराम ठाकुर
अक्स न्यूज लाइन शिमला 19 जून :
पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू झूठे हैं। वह अपने कार्यकाल के दौरान लगातार प्रदेश के हितों को बेच रहे हैं और खुद को हिमाचल का हितैषी होने का ढोंग रच रहे हैं। प्रदेश के लोग उनकी सच्चाई जान चुके हैं, इसलिए उनके किसी भी झूठ का अब कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री को इस बात का भ्रम हो गया है कि वही इकलौते प्रदेश हितैषी नेता हैं, जबकि उनके काम प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों के खिलाफ ही रहे हैं। उन्हें यह भ्रम नहीं पालना चाहिए और जनता में उनकी क्या छवि है, उसके बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के बजाय मित्रमंडल को तरजीह दी। हिमाचल प्रदेश ऑन सेल की मुहिम चलाई, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के विरोध और माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सफलता नहीं मिली। अब किशाऊ डैम को लेकर झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार का आभारी होना चाहिए कि उसने पहले भी हिमाचल प्रदेश के हितों को प्राथमिकता दी और आज भी प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री की बातों पर यकीन करना मुश्किल है, लेकिन वह जो दावा कर रहे हैं, वह इसलिए संभव हुआ क्योंकि हमारी सरकार के दौरान भी केंद्र सरकार से बातचीत में हमने हिमाचल के हितों को सर्वोपरि रखा था। हिमाचल के हितों को प्राथमिकता देने के कारण ही यह बातचीत लंबी चली। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि सरकारें बदलने से प्रदेश के हित नहीं बदल जाते और न ही पूर्व सरकार की उपलब्धियों और प्रयासों को खारिज किया जा सकता है।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के "हितैषी मुख्यमंत्री" सुक्खू जी बताएं कि प्रदेश के कई नेताओं के करीबी देशभर में घूम-घूमकर धारा 118 में छूट दिलाने का ठेका ले रहे थे, उन्हें किसका संरक्षण मिला था? कृषि विश्वविद्यालय की 110 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन किसके इशारे पर और किसे बेची गई थी? प्रदेश में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन को किसका संरक्षण प्राप्त है? प्रदेश में वन माफिया किसके इशारे पर तांडव मचा रहा है? शराब की अवैध फैक्ट्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय में किसका संरक्षण प्राप्त है? चेस्टर हिल जैसे 1500 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपी आला अधिकारियों को कौन बचा रहा था और क्यों बचा रहा था? कांग्रेस के एक बहुत ही वरिष्ठ नेता की शिमला स्थित जमीन पर मुख्यमंत्री के किस खास मित्र की नज़र थी? मुख्यमंत्री के एक करीबी व्यक्ति के बेटे पर हमले की थ्योरी क्या है? हिम-चंडीगढ़ के नाम से योजना बनाकर मुख्यमंत्री अपने किस करीबी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं, जो संबंधित पंचायत से जबरन अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का दबाव बना रहा है? पावर कॉरपोरेशन में कुछ खास ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव क्यों किया गया? एनएचपीसी और एसजेवीएनएल के प्रोजेक्ट लेकर आंध्र और कर्नाटक के निजी ठेकेदारों को क्यों दिए जा रहे हैं? विमल नेगी की मृत्यु कैसे हुई? हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में कौन से लोग उनकी मृत्यु के जिम्मेदार हैं और उनका मुख्यमंत्री कार्यालय तथा मुख्यमंत्री से क्या संबंध है? पेखुबेला में 150 करोड़ रुपये में बनने वाले प्रोजेक्ट को 260 करोड़ रुपये में किसने बनवाया? काम पूरा होने से पहले किसने ठेकेदारों को भुगतान करने का दबाव बनाया और क्यों बनाया? उस प्रोजेक्ट से कितनी बिजली मिली और काम कहाँ तक पहुँचा?
जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब मुख्यमंत्री के पास नहीं हैं क्योंकि नीयत में ही खोट है। जब ऐसे सवालों के जवाब मुख्यमंत्री से पूछे जाते हैं तो वह इधर-उधर की बातें करते हैं और झूठ बोलते हैं। किशाऊ प्रोजेक्ट के मामले में भी वही कर रहे हैं। चेस्टर हिल के आरोपियों पर कार्रवाई करने की उनकी हिम्मत नहीं है। पेखुबेला के आरोपियों को बचाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। कानून लाकर विधानसभा में धारा 118 को कमजोर करने का प्रयास किया। भ्रष्ट अधिकारियों के चंगुल में वह फंसे हुए हैं। पूरी तरह से समझौता कर चुके हैं। बस झूठ बोलकर और विपक्ष पर आरोप लगाकर खुद को हिमाचल हितैषी बताने का ढोंग रच रहे हैं। लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी सारी चालें बेनकाब हो चुकी हैं और उनकी बातों पर अब कोई यकीन नहीं करता।









