नाहन : नारीवाला-जम्बू खाले पर 100 पेड़ों के कटान पर ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर रोका कटान
अक्स न्यूज लाइन नाहन 1 अप्रैल :
लगभग 15 दिनों तक चले “जल, जंगल, जमीन बचाओ आंदोलन” का आज आर-पार की स्थिति के बीच शांतिपूर्ण समापन हो गया, हालांकि आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी व पर्यावरणविद नाथूराम चौहान ने सरकार और स्थानीय नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा मामला वोटों की राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जहां पहले से ही सड़क मौजूद है और नई सड़क की आवश्यकता नहीं है, वहां जबरदस्ती सड़क निर्माण के नाम पर सैकड़ों साल पुराने पेड़ों की कटाई की जा रही है।
चौहान ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेता बाहरी लोगों को खुश करने के लिए पर्यावरण और क्षेत्रीय सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम पर सड़क बनाई जा रही है, उन पर पहले से ही जंगल भूमि पर अवैध कब्जे और हजारों पेड़-पौधों के नुकसान के आरोप हैं। आंदोलन के दौरान तीन पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों ने पेड़ कटान का विरोध किया। पहले पेड़ों को “रक्षा सूत्र” बांधा गया, फिर “शस्त्र पूजन” किया गया और अंत में पेड़ों को बचाने के लिए उनके चारों ओर मानव श्रृंखला बनाकर खड़े हो गए। इस आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही।
वहीँ जब मौके पर कॉरपोरेशन और पुलिस विभाग के कर्मचारी पेड़ काटने पहुंचे, तो ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपककर उनका विरोध किया। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रही, लेकिन स्थानीय प्रशासन और लोगों की सूझबूझ से बड़ी घटना टल गई। ग्रामीणों के विरोध के बाद कॉरपोरेशन के अधिकारी बिना पेड़ काटे ही वापस लौट गए।
नाथूराम चौहान ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ शुरुआत है और पर्यावरण की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि विकास योजनाएं बनाते समय स्थानीय लोगों की भावनाओं और पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखा जाए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।





