नमो नेतृत्व के 12 वर्ष : भारत के आत्मविश्वास को नई पहचान देने वाला युग - संजय टंडन

नमो नेतृत्व के 12 वर्ष : भारत के आत्मविश्वास को नई पहचान देने वाला युग - संजय टंडन
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 अक्स न्यूज लाइन शिमला 16 जून :
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन के 12 वर्षों की यात्रा पर जब देश दृष्टिपात करता है, तो एक शब्द इस पूरे कालखंड का सबसे सटीक वर्णन करता है — विश्वास।

विश्वास न तो नारों से बनता है और न ही प्रचार अभियानों से। यह नेतृत्व, प्रदर्शन, जवाबदेही और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से अर्जित किया जाता है। पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने यह सिद्ध किया है कि जब शासन सेवा का माध्यम बनता है, तब नागरिक उसमें अपना विश्वास, सहभागिता और समर्थन व्यक्त करते हैं।

नए भारत की कहानी वास्तव में जनता और नेतृत्व के बीच बने उस अटूट विश्वास की कहानी है। वर्ष 2014 में देशवासियों ने नरेंद्र मोदी को ऐसे समय में नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी, जब आकांक्षाएं तो ऊंची थीं, लेकिन शासन व्यवस्था में भरोसा कमजोर पड़ चुका था। वर्ष 2019 में यह विश्वास और अधिक मजबूत जनादेश के रूप में सामने आया और 2024 में एक बार फिर जनता ने इसे दोहराया। लगातार तीन बार प्राप्त जनादेश केवल चुनावी विजय नहीं, बल्कि जनता के उस भरोसे का प्रमाण हैं जिसने वादों को परिणामों में बदलते देखा है।

आज भारत का युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त है। महिलाएं राष्ट्र निर्माण में अपनी बढ़ती भूमिका पर गर्व महसूस कर रही हैं। किसानों को विश्वास है कि उनकी आवाज देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंच रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तार केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, विकास और जवाबदेही आधारित शासन मॉडल पर जनता के विश्वास का प्रतिबिंब है।

यदि उपलब्धियों की बात करें तो आंकड़े स्वयं मोदी सरकार की विकास यात्रा की गवाही देते हैं। भारत का अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम कुछ वर्षों पहले जहां एकल अंक में था, वहीं आज लगभग 400 स्टार्टअप सक्रिय हैं। देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है और आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

81 करोड़ से अधिक लोगों को प्रतिमाह मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक घर बनाए जा चुके हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से 10.5 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल की सुविधा मिली है।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के जनधन खाते खोले गए हैं। लगभग 3 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है और 91 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है।

युवाओं के लिए कौशल विकास के नए अवसर सृजित हुए हैं। मुद्रा योजना के अंतर्गत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए गए हैं। 10,000 से अधिक स्टार्टअप्स को सरकारी सहायता और मान्यता प्रदान की गई है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में 70 करोड़ से अधिक लोग विभिन्न स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। किसानों को 44 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं तथा 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है।

आधारभूत संरचना के क्षेत्र में 26 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 1,100 किलोमीटर से अधिक मेट्रो नेटवर्क, रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण तथा देश में हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 164 होने जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की गई हैं।

इन 12 वर्षों में मोदी सरकार ने विकास को गरिमा, कल्याण को सशक्तिकरण और आर्थिक प्रगति को सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ा है। सरकार ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि सार्वजनिक संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं का हो। यही दृष्टिकोण जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करता है।

इन वर्षों में देश ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी अनुभव किया है। भारत की सभ्यतागत विरासत, राष्ट्रीय नायकों और ऐतिहासिक धरोहरों को पुनः राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया गया है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों का विकास सामाजिक न्याय और समावेशिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वहीं भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित कर जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान दिया गया।

विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ केवल सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प का प्रतीक है। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना शासन की उस नई सोच को दर्शाता है जिसमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी समान बल दिया गया है।

इंडिया गेट के निकट नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना, नए संसद भवन का निर्माण और औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्ति के प्रयास भारत के बढ़ते आत्मविश्वास के परिचायक हैं।

भारत की उपलब्धियां केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं रहीं। वैश्विक मंच पर भी देश की प्रतिष्ठा अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। कोविड महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के माध्यम से भारत ने विश्व कल्याण की अपनी भावना को सिद्ध किया। जी-20 की सफल अध्यक्षता ने भारत को वैश्विक दक्षिण की प्रभावशाली आवाज के रूप में स्थापित किया।

आज भारत में बढ़ता विदेशी निवेश, मजबूत कूटनीतिक संबंध और नए मुक्त व्यापार समझौते अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बढ़ते विश्वास का प्रमाण हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक शक्ति भी विश्वभर में नए आयाम स्थापित कर रही है।

कोविड-19 महामारी से लेकर स्वच्छ भारत अभियान, हर घर तिरंगा, फिट इंडिया, एक पेड़ मां के नाम, वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों तक, जनता की सक्रिय भागीदारी ने सरकारी योजनाओं को जन-आंदोलनों में बदल दिया। यही लोकतांत्रिक विश्वास की सबसे बड़ी शक्ति है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने निर्णायक नेतृत्व का परिचय दिया है। आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, रक्षा क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण और वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में कमी ने देशवासियों के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।

इन 12 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि कोई एक योजना, परियोजना या कार्यक्रम नहीं है। सबसे बड़ी उपलब्धि है — भारत के राष्ट्रीय आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना।

आज भारत अपनी विरासत पर गर्व करता है, अपने महापुरुषों का सम्मान करता है, अपने सैनिकों का गौरव बढ़ाता है, अपनी संस्कृति का उत्सव मनाता है और आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है।

मेरे दृढ़ विश्वास के अनुसार, इन 12 वर्षों की कहानी 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास की कहानी है। यही विश्वास भारत को एक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और विश्व में सम्मानित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ा रहा है। और इस परिवर्तनकारी यात्रा के केंद्र में हैं हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।
सह-प्रभारी, भारतीय जनता पार्टी, हिमाचल प्रदेश