₹3,500 करोड़ कटौती के बावजूद वादों की भरमार – पूरी तरह फेल होगा कांग्रेस सरकार का बजट : महाजन

₹3,500 करोड़ कटौती के बावजूद वादों की भरमार – पूरी तरह फेल होगा कांग्रेस सरकार का बजट : महाजन
अक्स न्यूज लाइन शिमला 23 मार्च :  
भाजपा राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने हिमाचल प्रदेश सरकार के बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट पूरी तरह विफल साबित होने वाला है और प्रदेश को गंभीर आर्थिक संकट की ओर ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि ₹58,514 करोड़ के पिछले बजट की तुलना में इस बार बजट घटाकर ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है, यानी लगभग ₹3,500 करोड़ की कटौती की गई है, जो हिमाचल के इतिहास में पहली बार हुआ है।
हर्ष महाजन ने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पूरे बजट का केवल 20% हिस्सा ही विकास कार्यों के लिए बच रहा है। उन्होंने बजट का स्पष्ट विश्लेषण करते हुए बताया कि
• 27% वेतन में खर्च होगा
• 21% पेंशन में जाएगा
• 13% ब्याज भुगतान में खर्च होगा
• 9% कर्ज की मूलधन अदायगी में जाएगा
• 10% विभिन्न संस्थानों को ग्रांट में जाएगा
इसके बाद सरकार के पास केवल ₹100 में से ₹20 ही बचते हैं, जिनसे पूरे प्रदेश के विकास कार्य—सड़कें, पुल, सिंचाई, बिजली, पानी, पर्यटन और अन्य योजनाएं चलाई जानी हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति साफ संकेत देती है कि प्रदेश की वित्तीय हालत बेहद खराब है और हिमाचल वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर ₹45,000 करोड़ से अधिक का नया कर्ज पिछले तीन वर्षों में लिया गया है और कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है, जबकि ब्याज और मूलधन मिलाकर लगभग 22% बजट कर्ज चुकाने में ही खर्च हो रहा है।
हर्ष महाजन ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े वादे कर रही है—₹1500 महिलाओं को देने की बात, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, अधूरे 300 कार्यों के लिए ₹500 करोड़—पर असली सवाल यह है कि जब बजट का आकार घट गया है और विकास का हिस्सा भी कम हो गया है तो इन वादों को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा?
उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भी ₹58,514 करोड़ के बजट के बाद ₹40,461 करोड़ का अनुपूरक बजट लाना पड़ा था, जिससे साफ है कि सरकार का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह फेल है। इस बार भी वही स्थिति दोहराई जाएगी।
महाजन ने कहा कि विकास के लिए बजट का हिस्सा लगातार घट रहा है—
• 2023-24 में 29%
• 2024-25 में 28%
• 2025-26 में 24%
• और अब 2026-27 में सिर्फ 20%
यह गिरावट दर्शाती है कि प्रदेश की विकास गति लगातार धीमी हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का खजाना “वेंटिलेटर” पर है, कैश फ्लो बिगड़ चुका है और सरकार केवल घोषणाओं के सहारे चल रही है।
उन्होंने सवाल उठाया:
क्या सरकार बिना नए कर्ज के साल निकाल पाएगी?
क्या कर्मचारियों, पेंशन और विकास के बीच संतुलन बना पाएगी?
क्या फिर से भारी अनुपूरक बजट नहीं आएगा?
अंत में हर्ष महाजन ने कहा कि यह बजट केवल कागजी घोषणाओं और राजनीतिक वादों का पुलिंदा है, जिसमें न तो वित्तीय मजबूती है और न ही विकास का स्पष्ट रोडमैप।
“यह बजट हिमाचल के विकास का नहीं, बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन, घटते संसाधनों और बढ़ते कर्ज का दस्तावेज है – और यदि हालात नहीं सुधरे तो प्रदेश वित्तीय आपातकाल की खतरनाक स्थिति में पहुंच सकता है।”