अक्स न्यूज लाइन नाहन 16 मार्च :
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सिरमौर जिले के शिलाई विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान के मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दिन-दहाड़े आरा मशीन लगाकर पेड़ों की कटाई की गई और उसके बाद भी प्रशासन लंबे समय तक कार्रवाई करने से बचता रहा, उससे स्पष्ट है कि इस पूरे मामले में सत्ता के संरक्षण की बू आ रही है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि 5 तारीख को दोपहर के समय आरा मशीन लगाकर चीड़ के पेड़ों का कटान किया गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बावजूद संबंधित विभाग ने उसी दिन कोई कार्रवाई नहीं की। अगले दिन स्वयं कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर आकर यह स्वीकार किया कि उन्होंने पेड़ काटे हैं और यह भी कहा कि उनके पास 25 पेड़ों की अनुमति है और बाकी अनुमति प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने तुरंत इस मुद्दे को उठाया और स्पष्ट किया कि दिन-दहाड़े इस प्रकार का अवैध कटान बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है। इसके बाद देर रात 6 तारीख को एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें लगभग 307 पेड़ों के कटान की बात कही गई और यह भी बताया गया कि अंधेरा होने के कारण पूरी गणना नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि आज तक भी गणना उसी संख्या पर अटकी हुई है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि संबंधित मंत्री ने बयान देकर इस मामले को भाजपा से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में भाजपा के लोग इसमें शामिल हैं तो सरकार तुरंत उन्हें गिरफ्तार करे और कानून के अनुसार कार्रवाई करे। लेकिन सच्चाई यह है कि जो लोग खुलेआम मीडिया में आकर कटान की बात स्वीकार कर रहे हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि 25 पेड़ों की अनुमति भी 25 फरवरी को समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सामान्य लोगों को दो-तीन पेड़ों की अनुमति पाने में महीनों लग जाते हैं तो आखिर 25 पेड़ों की अनुमति किस आधार पर दी गई और क्या इसमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका नहीं बनती?
डॉ. बिंदल ने कहा कि जिस स्थान पर यह कटान हुआ वह एसडीएम कार्यालय, पुलिस थाना और फॉरेस्ट रेंज कार्यालय से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद किसी अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं होना या समय पर कार्रवाई न करना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे को उठाया, तभी आनन-फानन में दो छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है। इस मामले में जिन अधिकारियों ने अनुमति दी और जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि इस मामले में सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की तो भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस प्रकार वन माफिया सक्रिय हो रहा है, उससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सरकार की शह उन्हें मिल रही है।
डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जहां 10 वर्षों में लगभग ₹18,000 करोड़ राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) मिला था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹89,000 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से मिलने वाले धन का सही उपयोग नहीं हो रहा और सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है। प्रदेश में सेवानिवृत्त कर्मचारी और अधिकारी अपने बकाया भुगतान के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, जो कि सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि सिरमौर जिले के साथ भी प्रदेश सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिरमौर और प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाती रहेगी और यदि सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो भाजपा सड़कों पर उतरकर जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।