लोक भवन में राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार के राज्य स्थापना दिवस आयोजित
राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथियों को भाईचारे एवं एकता की भावना के प्रतीक के रूप में पारंपरिक हिमाचली टोपी एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इन राज्यों से संबंधित सरकारी कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश में अपने कार्यकाल एवं जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए, जिससे उन्हें यहां प्राप्त आत्मीयता, सहयोग एवं अपनत्व की भावना का पता चलता है।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की शक्ति उसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसी पहलें विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देकर देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करती हैं। गुप्ता ने कहा कि बिहार, राजस्थान एवं ओडिशा अपनी प्राचीन सभ्यताओं, समृद्ध इतिहास और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को समझना राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
राज्यपाल ने कहा कि इन राज्यों के लोगों ने हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सौहार्द, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है, जिससे राष्ट्र की सामाजिक संरचना और सुदृढ़ होती है। इस अवसर पर राज्यपाल ने लोक भवन, शिमला को सप्ताह में दो दिन आम जनता के लिए खोलने की घोषणा भी की। इस पहल का उद्देश्य लोक भवन को जनता के और समीप लाना तथा नागरिकों में इस संस्थान के प्रति अपनत्व और जुड़ाव की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि लोक भवन केवल आधिकारिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां जनता की आकांक्षाओं और सहभागिता की भावना भी प्रदर्शित होनी चाहिए।
कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी उपस्थित थे।








