साहिब की महिमा अपार व्यंग्य : प्रभात कुमार

साहिब की महिमा अपार      व्यंग्य : प्रभात कुमार
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सृष्टि रचयिता ने जब आदम एवं ईव को धरती पर उतारा तो उनके पारिवारिक सम्बन्धों के प्रबंधन एवं विस्तार के
लिए सेब की भी रचना की । सेब को बेहद खुबसूरत प्रबंधक के रूप में प्रस्तुत किया गया जिन्होंने उन दोनों के
माध्यम से दुनिया बसाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की । मुझे लगता है यदि वह सेब न होता तो आदम एवं ईव
यह दुनिया बसा ही नहीं सकते थे । संसार की शुरुआत में उस खास सेब की शानदार विकासात्मक भूमिका देखते
हुए हम उन्हें सेब साहिब पुकारें तो कोई हर्ज़ नहीं है। हमारे समाज में बड़ा, यादगार, विकासात्मक कार्य करने वालों
के नाम के साथ साहिब चिपकाने की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक परम्परा है। हमारे अनेक लोग तभी साहिब कहे
जाते हैं और उनकी महिमा न्यारी होती है । विकासजी की विशाल दुनिया बसाने में साहिब लोगों का बड़ा हाथ है।
साहिब होते ही इच्छा उगने लगती है कि अब हमारी सेवा होनी चाहिए। साहिब की सेवा निरंतर करते रहो तो मेवा
स्वादिष्ट फलों की तरह स्वत मिलता रहता है। साहिब अपनी सेवा कभी खुद नहीं करते उनकी सेवा करनी पड़ती
है। साहिब और सेवा एक सिक्के के दो पहलु हैं। वे किसी के भी रास्ते से कोई भी गाड़ी हटवा सकते हैं या फंसा
सकते हैं। दूसरे साहिब से मिलकर दुनिया में कहीं भी मुफ्त यात्रा कर सकते हैं, शाकाहारी होते हुए भी कुछ भी,
छोटा या बड़ा निगल सकते हैं, जितना मर्ज़ी पचा सकते हैं और पचाना सिखा भी सकते हैं। बड़े साहिबों के साथ
दो चार छोटे साहिब भी लटक सकते हैं। छोटे स्तर के लोग उनके पीने और पीते रहने, खाना खाने और पचाने का
इंतज़ार करते हैं। करना पड़ता है, साहिब का इंतज़ार है, आम आदमी का तो है नहीं । साहिब को सभी जगह
प्राथमिकता मिलती है उनके द्वारा पूजा करवाते ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं और पुजारीजी उन्हें मंत्रीजी व
ठेकेदार के सहयोग से इलाके का वोटचाहा विकास करवाने का आशीर्वाद हाथोंहाथ पकड़ा देते हैं। उधर सरकारी
योजनाओं का लाभ लेने वाले उनके दफ्तर के चक्कर काटने के बाद नीली छतरी के नीचे भजन करते रहते हैं
लेकिन ऊपर वाला उन्हें समय नहीं देते । साहिब द्वारा धार्मिक अनुष्ठान व पाठ करवाने से उनके पिछले काले,
लाल, तिकोने, गोल और चौरस पाप हवन कुंड में भस्म हो जाते हैं लेकिन आम लोगों के पाप हरिद्वार में गंगाजी
में नहाने से सिर्फ धुलते ही हैं । अगर साहिब चाहें तो मंत्रीजी को चेला बनाकर रख सकते हैं। साहिब और राजनीति
के साहिब मिलकर ऐसा अध्याय लिखते हैं कि ज़िंदगी उनके आशीर्वाद के बिना नहीं चल सकती। यद्यपि सरकार
ने साहिब की लालबत्ती उतार दी है लेकिन उनके दिमाग में जलते हुए लगातार प्रकाश फैला रही है । साहिब के
लिए कुछ मुश्किल नहीं है वे एक इशारा कर दें तो पारिवारिक शादियों और समारोहों में प्रायोजकों की भीड़ लग
जाती है। ज्ञानी जन कहते हैं कि साहिब लोग ही असली सरकार होते हैं। साहिब के साथ अगर दोस्ती हो जाए और
ईमानदारी से निभती रहे तो राजनीतिक गच्चों, मंत्रियों के क्रूरपुर, जनता के चिंतापुर व ताक़त के रौद्रपुर जाने से
बचा जा सकता है। स्वामी, मालिक, बॉस, शाबजी कहे जाने वाले साहिब अड़ जाएं तो कोई भी योजना धूल में
मिल सकती है वे चाहें तो धूल भी योजना हो सकती है। वे चाहें तो मिट्टी करोड़ों में खरीदी जा सकती है न चाहे
तो करोड़ों मिट्टी हो सकते हैं । साहिब महिमा अपार है।
गुलिस्तान ए साथी, पक्का तालाब, नाहन 173001 (हिप्र) 9816244402