तीर्थन, जीभी एवं फालाचन घाटियों की नदियों में 20 हजार ब्राउन ट्राउट फिंगरलिंग्स छोड़ी
अक्स न्यूज लाइन कुल्लू 24 जून :
मत्स्य विभाग ने तीर्थन घाटी, जीभी तथा फालाचन क्षेत्र की नदियों में मत्स्य संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन तथा एंगलिंग (मत्स्य आखेट) पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20,000 ब्राउन ट्राउट फिंगरलिंग्स का संचयन किया है।
विभाग द्वारा डेनमार्क से आयातित उच्च गुणवत्ता वाली ब्राउन ट्राउट प्रजाति की फिंगरलिंग्स में से लगभग 10,000 फिंगरलिंग्स तीर्थन घाटी के बठाहड़, तुंग एवं गुशैणी क्षेत्र में तथा 10,000 फिंगरलिंग्स फालाचन नदी एवं जीभी-घ्यागी क्षेत्र के विभिन्न जल स्रोतों में छोड़ी गईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपमंडल अधिकारी (नागरिक) बंजार पंकज शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि तीर्थन घाटी देश-विदेश के पर्यटकों और एंगलिंग प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। नदियों में गुणवत्तायुक्त ट्राउट फिंगरलिंग्स के संचयन से भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका, पर्यटन गतिविधियों तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी, ट्राउट फार्म हमणी, दुनी चंद आर्य ने बताया कि विभाग द्वारा नियमित रूप से नदी तंत्र में मत्स्य बीज संचयन कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जिससे प्राकृतिक जल स्रोतों में ट्राउट मछलियों की संख्या बनी रहे। उन्होंने कहा कि ब्राउन ट्राउट हिमालयी क्षेत्रों के स्वच्छ एवं शीतल जल के लिए उपयुक्त प्रजाति है और इसके संवर्धन से क्षेत्र में एंगलिंग पर्यटन को और मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर उपनिदेशक मत्स्य पतलीकूहल जय सिंह, वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी अरुण कांत वर्मा, तीर्थन पर्यटन संगठन के प्रधान वरुण भारती, पर्यटन संगठन के प्रधान कृष्ण तराव, एंगलिंग संगठन के महासचिव संदीप कंवर सहित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी तीर्थन, जीभी एवं फालाचन घाटियों की नदियों में मत्स्य संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। स्थानीय लोगों एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों ने विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में मत्स्य आखेट पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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