अक्स न्यूज लाइन शिमला 31 मार्च "
: हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कांग्रेस सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भाजपा विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हाई-टेक रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद में भारी भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता और जनहित की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विपिन परमार ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है कि प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं लाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टांडा और चमियाना मेडिकल कॉलेजों में लगाई गई रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध है। करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से लाई गई इन मशीनों के टेंडर और आवंटन को लेकर सरकार अब तक कोई स्पष्ट जानकारी देने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि ई-टेंडरिंग के माध्यम से एक विदेशी कंपनी को काम सौंपा गया, लेकिन किन शर्तों पर यह ठेका दिया गया, इसमें कितनी कंपनियों ने भाग लिया और चयन की प्रक्रिया क्या रही—इन सभी सवालों पर सरकार चुप्पी साधे बैठी है। यह चुप्पी अपने आप में बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है।
परमार ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस तकनीक को आम जनता की सुविधा के नाम पर लाया गया, वही आज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है। जहां एक ओर सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी 20 से 25 हजार रुपये में संभव है, वहीं रोबोटिक सर्जरी का खर्च डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रहा है। यह स्पष्ट करता है कि यह सुविधा केवल चुनिंदा लोगों के लिए है, न कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए।
विधायक परमार ने सरकार से सवाल किया कि क्या आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाओं के तहत इन महंगी सर्जरी का लाभ दिया जा रहा है? यदि नहीं, तो फिर गरीब और बीपीएल वर्ग के मरीजों के लिए इस तकनीक का क्या औचित्य है? परमार ने कहा कि सरकार ने हाई-टेक का दिखावा कर जनता को भ्रमित करने का काम किया है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की बदहाल स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है। कई जगह ऑपरेशन थिएटर तक पूरी तरह कार्यशील नहीं हैं, रेडियोलॉजिस्ट और लैब तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को बुनियादी इलाज के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय केवल दिखावटी योजनाओं और महंगी तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार स्वास्थ्य बजट में कटौती हुई है, जबकि प्रदेश में डायबिटीज, कैंसर और ब्लड प्रेशर जैसे गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार इन गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बना पा रही है।
परमार ने दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हाल ही में बड़ी संख्या में दवा सैंपल फेल पाए गए हैं, जो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हैं। उन्होंने कहा कि जब दवाएं ही मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं, तो सरकार के दावे पूरी तरह खोखले साबित होते हैं।
उन्होंने मांग की कि रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद, लागत, टेंडर प्रक्रिया और उनके उपयोग से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं, ताकि सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने आ सके।अंत में विपिन परमार ने कहा कि तकनीक का विरोध नहीं है, लेकिन प्राथमिकता तय करना सरकार की जिम्मेदारी है। जब तक प्रदेश में बुनियादी स्वास्थ्य ढांचा मजबूत नहीं होगा, डॉक्टरों की भर्ती नहीं होगी और सस्ती व सुलभ इलाज व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसी महंगी तकनीकें केवल दिखावा बनकर रह जाएंगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया, तो भाजपा इस मुद्दे को प्रदेशभर में जोरदार तरीके से उठाएगी।