सीबीएसई स्कूल के लिए शिक्षकों के अलग केडर के विरोध में उतरा प्रवक्ता संघ
अक्स न्यूज लाइन नाहन 27 जनवरी :
स्कूल प्रवक्ता संघ जिला सिरमौर ने सरकार के सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने के निर्णय का स्वागत किया है। वहीं संघ ने प्रवक्ताओं की नई परीक्षा करवाने एवं अलग केडर बनाने एवं परीक्षा के प्रस्ताव को अनुचित बताया है। संघ का कहना है कि विद्यालयों में कार्यरत नियमित शिक्षक पहले ही कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर सेवा में आए हैं, इसलिए सीबीएसई स्कूलों के लिए अलग से परीक्षा करवाने का औचित्य नहीं बनता।
प्रवक्ता संघ सिरमौर के प्रतिनिधियों ने कहा कि जहां शिक्षा विभाग सी बी एस ई के लिय सैकड़ों शिक्षकों की आउटसोर्स भरती करवा रही है तथा अस्थाई शिक्षकों की सेवाओं को बिना परीक्षा के ही सी बी एस ई विद्यालयों में निरंतर जारी रखने का प्रस्ताव है वहीं 15 से 25 वर्ष तक का शैक्षणिक अनुभव रखने वाले शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा करवाना उनकी क्षमता दक्षता तथा अनुभव का मजाक है जबकि शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी शिक्षक समय समय पर आयोजित किए जा रहे जिला राज्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड़ पर नई -नई पेडागोजी और कौशलों का प्रशिक्षण ले चुके है।अतः उनके लिए किसी तरह की परीक्षा का करवाना बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं है।
हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, ,राज्य विशिष्ट सदस्य नरेंद्र नेगी, जिला अध्यक्ष डॉक्टर आई डी राही ,राज्य संरक्षक रमेश नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शर्मा , महिला विंग सिरमौर अध्यक्ष संध्या चौहान, जिला सिरमौर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ,महासचिव दिनेश शर्मा ,कोषाध्यक्ष लाल सिंह ठाकुर तथा अन्य सभी राज्य एवं जिला कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रेस में जारी बयान में कहा कि यदि कोई प्रवक्ता स्वेच्छा से सीबीएसई विद्यालय में कार्य नहीं करना चाहता तो विकल्प के तौर पर अन्य प्रवक्ताओं से सहमति ली जा सकती है लेकिन नई परीक्षा या अलग कैडर बनाने की प्रक्रिया न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।
उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या का व्यवहारिक हल निकाले और सी बी एस सी और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबधता प्राप्त सभी विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाए तथा उन्हें सयुंक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए न कि संबंधित विद्यालय की वरिष्ठता पर । स्थानांतरण नीति में कोई बदलाव न हो बल्कि सभी शिक्षकों को सीबीएसई में पढ़ाने का अवसर मिले तथा सीबीएसई की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा जाए ।
सी बी एस ई विद्यालयों के लिय शिक्षकों की दक्षता तथा क्षमता के अनुसार अधिकतम सेवाकाल दस वर्ष का हो सकता है परंतु न्यूनतम सेवाकाल पूर्व की भांति तीन वर्ष ही रखा जाए ताकि दूर दराज के शिक्षकों को भी इन विद्यालयों में कार्य करने का मौका मिले। प्रवक्ता संघ ने सी बी एस ई हेतु की जा रही आउटसोर्स भरती का भी विरोध किया तथा कहा कि इस से शिक्षकों के मध्य एक ओर खाई पैदा होगी।
उन्होंने कर्मचारियों के लम्बे समय से लंबित वेतनमान की बकाया राशि और महंगाई भत्ते की किश्त जारी करने की भी माँग की।अंत में शिक्षा निदेशक स्कूल शिक्षा हिमाचल प्रदेश को स्कूल शिक्षा उप निदेशक गुणवत्ता एवं उच्च के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।





