शिमलाः ABVP की नीतियों के खिलाफ SFI दिया धरना,जमकर नारेबाजी की...
27 फरवरी को SFI द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में UGC रेगुलेशन के समर्थन में एक 'ओपन टॉक' (Open Talk) का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और शैक्षणिक सुधारों पर सकारात्मक चर्चा की। कार्यक्रम की सफलता और छात्रों के भारी समर्थन से बौखलाकर, ABVP के लोगों ने कार्यक्रम के बाद SFI कार्यकर्ताओं के साथ बहस शुरू की और देखते ही देखते हाथापाई पर उतर आए। इसके अगले ही दिन ABVP द्वारा जो छात्र चंबा में हुए UGC विनियम, 2026 के समर्थन में SFI के साथ मिलकर संघर्ष कर रहे थे, उन छात्रों पर सुनियोजित तरीके से तेजधार हथियारों से हमला किया जाता है। जिनमें से एक छात्र दलित समुदाय से तालुक रखता था जिसका कि दांत टूटा है और एक छात्र मुस्लिम था जिसके सर पर गंभीर चोटे आई है।
इसके बाद एस एफ आई शिमला जिला सचिव पवन कुमार ने कहा कि ABVP न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि पूरे देश में जातिगत और सांप्रदायिक हिंसाओं को बढ़ाने का काम कर रही है। इससे पहले JNU में जब वामपंथी संगठनों द्वारा UGC विनियम 2026 के समर्थन में समता मार्च निकाला गया था उस शांतिपूर्वक प्रदर्शन को भी ख़राब करने की कोशिश की जाती हैं। उसके बाद जब JNU के वाइस चांसलर द्वारा पॉडकास्ट के माध्यम से जातिगत टिपण्णी की जाती है, उसके विरोध में जब सभी संगठन व आम छात्र मार्च कर रहे थे तब उस वक्त भी ABVP के गुंडों द्वारा JNU छात्र संघ और अन्य छात्र समुदाय पर पथराव किया जाता है, जो कि इनकी संकुचित व नफ़रती मानसिकता का साफ सबूत है। इसी तरीके की घटनाएं आंबेडकर विश्विद्यालय दिल्ली, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय , अजीम प्रेमजी विश्विद्यालय बेंगलुरु और अन्य शिक्षण संस्थानों में देखी गई है। जो ABVP की संकीर्ण, जातिवादी और सांप्रदायिकता को दर्शाता है। ABVP लगातार शिक्षण संस्थानों में माहौल खराब करने और छात्र राजनीति को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। अपनी बात को तर्कों के साथ न रख पाने की हताश में हिंसा का सहारा लेना ABVP के वैचारिक दिवालियापन को दर्शाता है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और चंबा में ABVP के इस हिंसक हमले में SFI के 3 कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी। SFI राज्य नेतृत्व का मानना है कि यह हमला केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक ढांचे और बोलने की आजादी पर हमला है।
SFI विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और पुलिस प्रशासन से यह मांग करती है कि इस हमले में शामिल दोषियों को तुरंत चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। SFI यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि वह इस तरह के हमलों से डरने वाली नहीं है। हम छात्रों के अधिकारों और एक बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए अपना संघर्ष और तेज करेंगे।




