आगामी वित्त वर्ष में शिक्षा पर 10 हजार करोड़ से अधिक व्यय करेगी प्रदेश सरकार: रोहित ठाकुर
रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करते हुए एक मजबूत आधार तैयार किया है। स्कूल शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक समन्वय के उद्देश्य से शिक्षा निदेशालयों का पुनर्गठन किया गया है, जिसके अंतर्गत स्कूली शिक्षा निदेशालय और उच्च शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम को लागू किया गया है ताकि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
शिक्षा मंत्री ने प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं आरंभ की हैं तथा इसके लिए शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों की रुचि के अनुरूप पाठ्य सामग्री विकसित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) सोलन के सहयोग से विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए प्रदेश सरकार विभिन्न श्रेणियों के लगभग 8 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां की हैं, जिनमें बैच वाइज 4 हजार शिक्षकों की भर्ती शामिल है। उन्होंने कहा कि 937 टीजीटी की भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कर लिया गया है जबकि 18 सौ जेबीटी की भर्ती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। इसके साथ ही उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश के कॉलेजों में 387 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों के लिए प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से युक्तिकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी है, ताकि अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही विद्यालयों के संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए फर्नीचर, खेल सामग्री, संगीत, वाद्य यंत्र और खेल मैदान जैसे संसाधनों को साझा करने की व्यवस्था लागू की गई है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सरकारी विद्यालयों को उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के रूप में अधिसूचित किया गया है, जहां स्मार्ट कक्षाएं, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, वर्चुअल कक्षाएं और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया गया है। शिक्षकों और विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बल मिला है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए लगभग 33 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा आकलन आधारित ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जा रहा है, जिसे कैंब्रिज विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत सैकड़ों शिक्षकों और मेधावी विद्यार्थियों को विदेश भेजा गया है, ताकि वह आधुनिक वैश्विक शिक्षण तकनीकों से अवगत हो सकें।
शिक्षा मंत्री ने ‘अपना विद्यालय’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत प्रदेश के सरकारी विद्यालयों को विभिन्न अधिकारियों द्वारा गोद लिया गया है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयी वातावरण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों के पद सृजित कर समावेशी शिक्षा को सशक्त तथा विद्यालय निरीक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि शून्य नामांकन वाले विद्यालयों को बंद या समीपवर्ती विद्यालयों में विलय कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और सुदृढ़ बनाया गया है। मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड संबंधी परामर्श जारी कर विद्यालयों में एक अनुशासित और पेशेवर वातावरण विकसित करने का प्रयास किया गया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो प्रदेश सरकार की शिक्षा सुधार नीति की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्चुअल कक्षाओं के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी विज्ञान जैसे विषयों में समान अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के 130 सरकारी विद्यालयों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया गया है। इन विद्यालयों में कक्षा पहली से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा।
इस अवसर पर उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पंजगाईं को आगामी चरण में सीबीएसई स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शामिल करने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने स्कूल की बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए 10 लाख रुपये तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों के लिए 21 हजार रुपये देने की घोषणा की।
इस अवसर पर पूर्व विधायक बंबर ठाकुर, तिलक राज शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजना धीमान, प्रदेश बाल कल्याण समिति की सदस्य तृप्ता ठाकुर, एसडीएम सदर डाॅ. राजदीप सिंह, जिला परिषद सदस्य गौरव शर्मा, उपनिदेशक उच्च शिक्षा रेणु कौशल, उप उपनिदेशक डाइट निशा गुप्ता, उपनिदेशक प्रारम्भिक शिक्षा नरेश चंदेल सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।





